चैलेंज की कहानी हिंदी

चैलेंज की कहानी हिंदी

यह कहानी है, अनिता की जो कंप्यूटर इंजिनियर बनने का सपना लेकर इंदौर के एक बड़े कॉलेज में पढ़ने के लिए आती है। वह यहां पर एक हॉस्टल में रहती थी। अनिता के अलावा उसके कमरें में तीन लड़कियां और भी रहती थी, जिनसे उसकी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी।

वे सब पढ़ने के साथ साथ मस्ती भी करते रहते थे। उनके कमरे की खिड़की के बाहर से ही हॉस्टल का गार्डन दिखाई देता था।

वे चारों रुम मेट रात में काफी देर तक गप्पे मारते हुए बैठती थी और एक दूसरे को अपने अपने शहरों की बातें बताया करती थी। एक बार उनकी बातचीत का विषय था भूत प्रेत। क्योंकि कुछ दिनों पहले ही उनके हॉस्टल की एक लड़की, अपनी पढ़ाई छोड़ कर, वापस चली गई थी क्योंकि उसका कहना था कि हॉस्टल में भूत है जिसे उसने कई बार महसूस किया है और देखा भी है। लेकिन वार्डन सहित किसी भी बड़े ने उसकी बात का विश्वास नहीं किया था। लेकिन पीछे दबी आवाज में इस पर बात जरूर होती रही थी।

तो इसी बात से उनकी बातचीत आगे बढ़ी और फिर सभी अपने अपने शहर में घटी घटनाओं के बारे में बताने लगे। भूत प्रेत यह एक ऐसा टॉपिक होता है, जिस पर आधारित घटनाओं को सुनने, पढ़ने या देखने में सबकी बड़ी दिलचस्पी होती है। लेकिन बाद में अकेले में सभी उन कहानियों को याद करके डरने लगते हैं। सभी बहुत इन्ट्रेस्ट के साथ कहानियां कह और सुन रहे थे। कहानियां सुनना और सुनाना खत्म होने के बाद वे अब उस पर चर्चा कर रहे थे। अनिता कहती हैं कि,

” मुझे तो ये सब कहानियां मनगढ़ंत ही लगती है। भूत प्रेत जैसी कोई चीज इस दुनियां में होती ही नहीं है।”

इस पर उसकी रुम मेट हर्षा कहती हैं कि,

” ऐसी कोई बात नहीं है, इतने सारे लोगों को अनुभव आया है तो कोई सच्चाई तो जरुर होगी, मैं तो मानती हूं कि भूत प्रेत होते हैं।”

तीसरी रुम मेट रानी भी यही कहती हैं कि भूत प्रेत होते हैं,

” मैं भी यही मानती हूं कि भूत प्रेत होते ही हैं, क्योंकि जिस तरह भगवान हमें दिखाई नहीं देते हैं लेकिन वे होते हैं, उसी तरह भूत प्रेत का भी अस्तित्व होता है जो केवल महसूस होता है।”

चौथी रुम मेट, रुपा, अनिता का समर्थन करते हुए कहती हैं कि,

” मैं अनिता की बात से बिल्कुल सहमत हूं। मैं भी यही सोचती हूं कि भूत प्रेत केवल कहानियों की दुनियां में ही होते हैं। इन कहानियों को रचा जाता है। क्योंकि हमें मजा आता है यह कहानियां सुनने में।”

कुछ देर तक यूं ही बहस चलती रही और वे चारों ही अपनी बात पर अडिग थे।

तभी उनके कमरे के दरवाजे पर दस्तक होती है। तो चारों एक पल के लिए घबरा जाते हैं कि इतनी रात को कौन आया होगा। अनिता हिम्मत जुटाकर उठ कर दरवाजा खोलने जाती है। धीरे से दरवाजा खोलकर देखती है तो बाहर उनकी वॉर्डन खड़ी होती है।

” क्यों , तुम लोग सोई क्यों नहीं अब तक। रात के बारह बज रहे हैं। या तो फिर धीरे धीरे बाते करो, बाहर तक आवाजें आ रही है।”

” सॉरी मेम, हम लोग अब ध्यान रखेंगे और धीरे धीरे बातें करेंगे।”

अनिता के पीछे खड़ी रानी ने कहा।

कमरे में एक नजर घुमाकर, वार्डन वहां से चली गई।

वे लोग एक बड़ी सांस छोड़ते हुए अपनी अपनी जगह पर जाकर बैठ गई। और धीरे धीरे बातें करने लगी। हर्षा ऐसे बैठी थी कि उसकी पीठ दरवाजे की तरफ और मुंह कमरे की खिड़की की तरफ था। तभी उसे लगता है कि खिड़की में से कोई घूरकर देख रहा है। अंधेरे में केवल दो चमकदार आंखें ही उसे दिखाई दे रही थी। वह घबराकर बोली,

” देखो तो खिड़की के बाहर ऐसा लग रहा है कि कोई हमें घूरकर देख रहा है।”

सबने घूमकर देखा तो उन्हें वहां ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दिया। अनिता उसका मजाक उड़ाते हुए कहती हैं,

” तुम्हें जरुर कोई भूत दिखा होगा या फिर चुड़ैल, हमारी कहानियों से बाहर निकलकर वह वहां खिड़की के बाहर पहुंच गए होंगे।”

और सब हंसने लगे। हर्षा रोंआसी हो गई क्योंकि सब उसके उपर हंस रहे थे, लेकिन उसने जो देखा था बिल्कुल साफ साफ देखा था।

सब फिर से बातों में बीजी हो गए। रुपा कहती हैं,

” तुम्हें पता है कि जब मीनी चली गई तो हमारी सिनियर्स का ग्रुप हॉल में बैठकर इसी बात पर चर्चा कर रहा था कि कई बार ऐसा होता है कि रात को बाथरूम के नल अपने आप खुल जाते हैं, कोई गीली स्लीपर पहनकर आवाज करते हुए कॉरीडोर में चलता है, कोई कमरे में चीजें गिराता है, कोई  कपड़े और किताबें फाड़ देता है, कोई गार्डन में घुमता है और खिड़कियों में से अंदर झांकता है, आधी रात को दरवाजे पर दस्तक देता है लेकिन दिखाई नहीं देता है।”

और तभी दरवाजे पर फिर से जोर जोर से दस्तक होती है, तो सभी के मुंह से चीख निकल जाती है।

अब हर्षा जाकर दरवाजा खोलती है तो बाहर उसे कोई भी दिखाई नहीं देता है। उनका कमरा बाथरूम के बिल्कुल पास में था, तो बाथरूम में से सभी नलों के एक साथ शुरू होने की आवाजें आ रही थी। हर्षा ने घबराकर दरवाजा बंद कर दिया।

” देखा, देखा तुम लोगों ने कि इतनी जोर से दस्तक देने के बाद भी बाहर कोई नहीं था। और वो पानी की आवाज। वो तो तुम सबने भी सुनी ना। अब हंसों मुझ पर।”

अब रुपा और रानी भी हर्षा से सहमत थे कि कुछ तो हैं जो असामान्य है। लेकिन अनिता अभी भी अपनी बात पर ही अडिग थी।

” तुम लोग चाहे जो कहो लेकिन मैं तो यही मानूंगी, कि यह सब धोका है बस। दरवाजे पर दस्तक देने के कितनी देर बाद हर्षा ने उठकर दरवाजा खोला था, इतनी देर में तो जो होगा वो चला ही गया होगा। और हो सकता है कि बाथरूम में कोई हो, इसमें हैरानी की क्या बात है, क्या किसी को रात में बाथरूम में जाने की जरुरत नहीं होती है क्या। मैं तो बिल्कुल इन बातों में ना तो बिलिव करती थी ना करती हूं और ना ही करुंगी, ये विज्ञान का युग है, यह सभी बातें केवल किस्से कहानियों में ही अच्छी लगती है, रियल दुनियां में नहीं। मैं तो तुम लोगों को भी यही कहुगी कि तुम लोग भी इन बातों पर बिलीव करना छोड़ दो।'”

अनिता ने लंबा सा भाषण दे डाला।

” अच्छा चल, तो हम तुझे एक चेलेंज देते हैं कि कल रात को तू अकेली इस कमरे में सोएगी। हम तीनों कॉमन हॉल में सोएंगे। और यदि भूत अभी हमारे आसपास होगा और हमारी बात को सुन रहा होगा तो वह तुझे कल ही किसी तरीके से यह विश्वास दिलाएगा कि भूत होते हैं।” हर्षा ने कहा।

” हां अनिता, तू मानती हैं ना कि भूत नहीं होते हैं तो तू ये चेलेंज एक्सेप्ट कर ले।” रुपा ने कहा।

” तो फिर ठीक है, मैं ये चेलेंज एक्सेप्ट करती हूं।” अनिता ने चेलेंज को एक्सेप्ट करते हुए कहा।

दूसरे दिन तय प्रोग्राम के अनुसार, अनिता कमरे में अकेली ही थी। रात को बारह बजे दरवाजे पर दस्तक हुई तो अनिता निडरता से उठी और दरवाजा खोलकर देखने लगी, बाहर कोई नहीं था लेकिन एक बर्फ सी थंडी लहर अंदर आई। और उसने कंधे उचकाकर दरवाजा बंद कर दिया।

उसे डर तो नहीं लग रहा था लेकिन नींद भी नहीं आ रही थी। पढ़ाई भी हो गई थी तो कुछ करने के लिए भी नहीं था। वह उठकर खिड़की के पास गई और बाहर देखने लगी। तभी एकदम से कोई उछलकर उसके सामने खड़ा हो गया। वह एक भयानक सा चेहरा था, जो बुरी तरह जखमी था, और जगह जगह से खून बह रहा था। वह एक औरत थी, जो अजीब सी आवाजें निकालते हुए उसे घूर रही थी। उसे देखकर अनिता पीछे भागने को हुई तो उस औरत ने उसका हाथ पक्का पकड़ लिया। और एक मिनट बाद जोर से छोड़ दिया। अनिता जोर से नीचे गिर गई तो वह औरत हंसने लगी। अब वह अंदर आ गई थी और कमरे की चीजें इधर उधर फेंक रही थी। पूरे कमरे को तहस नहस करने के बाद वह कोने में जाकर बैठ गई और गुर्राते हुए अनिता को घूरती रही। अनिता की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह जगह से हिल भी पाए। और वह वहीं पर पड़े पड़े ही बेहोश हो गई थी।

सुबह जब होश आया तो दरवाजे पर जोर जोर से दस्तक हो रही थी, सब उसे आवाजें दे रहे थे। अनिता अपने बेड पर ही सोई थी। उसने कमरे पर नजर दौड़ाई तो सबकुछ एकदम ठीक ठाक था। कमरें में कही भी कोई निशान नहीं था कि रात को कमरे में कुछ हुआ था. वह मुस्कुराने लगी कि वो तो बस एक सपना ही था। और दरवाजा खोलने के लिए उठने लगती है तो उसे महसूस होता है कि पीठ में दर्द हो रहा है, जैसा गिरने के बाद होता है। उसने पलंग के हत्थे को पकड़कर उठने की कोशिश की तो उसे अपने हाथ पर उंगलियों की पकड़ का गहरा लाल निशान दिखाई दिया। वो घबरा गई और सोचने लगी कि तो क्या वो सपना नहीं था? तभी टेबल पर रखी हुई किताब अपने आप नीचे गिरती है। अनिता सब समझ जाती है और चेलेंज में हार स्वीकार करके दरवाजा खोलने जाती है।

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