खोफ की वो रात कहानियाँ

        खोफ की वो रात कहानियाँ

Synopsis –  विनय नीलपुर के सबसे अच्छे होटल में रूम बुक करता है लेकिन वो  उस कमरा पानी से भर जाता है जिसे देख कर वो डर जाता है ये पानी कहाँ से आया..

कोइ भूत उसे पानी में डूबा देता है | उसे लगता है की ये सपना है, ये हकीकत | उसे जब होश आता है तो वो देखता कि एक बूढ़ी औरत थी, जिसका चेहरा बालों से ढका हुआ होता है | आखिर कोन है वो ओरत …? ये सब जाने के लिए कहानी पढते हैं |

मीठे मीठे सपनों में खोए हुए विनय को एक ऐसा लगा मानो वो किसी अँधेरे कुएँ में डूब रहा हो!

चौंकते हुए वो उठ बैठा!

उसका कमरा…पानी से भरा हुआ था!

लेकिन ये कैसे सम्भव था?

विनय को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । उसने तो नीलपुर के सबसे अच्छे होटल में रूम बुक किया था, फिर ये पानी कहाँ से आया?

तभी उसके देखते ही देखते फर्श पर पानी का गोल-गोल भंवर बनने लगा

और वो उसकी तरफ़ खिंचने लगा!

खौफ़ के मारे उसकी आँखें फटने को थीं.. !

उसने बहुत कोशिश की बचने की पर वो भंवर में फँस गया। उसके कुछ समझ पाने से पहले ही पता नहीं कहाँ से दो हाथ प्रकट हुए…हाथ कहना गलत होगा क्योंकि वे मात्र हड्डियों का ढाँचा थे।

उन भूतिया हाथों ने उसे पानी में डुबो दिया। विनय को लगा कि उसका अंत आ गया लेकिन तभी उन्हीं हाथों ने उसे

ऊपर खींच लिया!

राहत की सांस ले पाता उससे पहले ही फिर से वो पानी के अंदर था !

ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि वो बेहोश ना हो गया !

उसके बेहोश होते ही सब कुछ सामान्य हो गया।जब उसको होश आया तो वो अपने बिस्तर पर था और पानी की एक बूंद भी कमरे में नहीं थी!

ये कैसे हो सकता था?

क्या ये सपना था ? विनय का हाथ अपने गले पर गया जहाँ बहुत दर्द हो

रहा था। अगर ये सब सपना होता तो उसको दर्द नहीं होता और ना ही हाथों पर ख़रोंच के निशान बनते!

विनय तुरन्त कूद कर बिस्तर से निकला और सीधा होटल रिसेप्शन पर पहुंचा!

बहुत कहा-सुनी के बाद वो होटल से चला गया। पेशे से एक कंपनी का फील्ड वर्कर विनय किसी काम से नीलपुर आया

था। तीन दिन का स्टे था तो कंपनी ने पहले ही ठहरने का इंतजाम नीलपुर

में करवा दिया था। उसे क्या पता था कि उसके साथ ये सब होगा।

 उसका रूम नम्बर 213 उसके दिमाग में घूम रहा था। उसे अब याद आ रहा था

कि चाबी देते वक्त रिसेप्शन पर खड़े लड़के का हाथ लड़खड़ा रहा था।

पर क्यों?

इसका जवाब उसके पास नहीं था और वो जानना भी नहीं चाहता था। उधर होटल का मालिक रवि खन्ना परेशान था क्योंकि उसे पता था कि रूम नम्बर 213 में हर अमावस को रुकने वाले के साथ क्या होता है !

मजबूर था, चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता था….!

कारण था , उसके परिवार पर चला आ रहा एक श्राप जिसको कई पीढ़ियों

से उन्हें भुगतना पड़ रहा था!

आधी रात को उसे लगा कि वो गहरे समुद्र में डूब रहा है, होश में आने पर उसने अपने आपको पानी के भवँर में डूबते हुए पाया। उसका दिमाग ये सब झेल नहीं पाया और वो बेहोश हो गया!

उसका दुर्भाग्य कि उसको जबरन होश में लाया गया किसी अदृश्य शक्ति

द्वारा!

उसने देखा कि वो एक बूढ़ी औरत थी जिसका चेहरा बालों से ढका हुआ

था!

.

“तुम ऐसे नहीं बच पाओगे, तुम्हें होश में ही रह कर सब सहन करना

होगा, यहीं तुम्हारी और मेरी नियति है! “

गुर्राहट करती हुई वो बुढ़िया पानी में भीगी हुई थी और उससे सीलन जैसी

बदबू आ रही थी !

“कौन हो तुम?” रवि ने हिम्मत करके पूछा!

“मैं तुम्हारे परिवार की तीसरी पीढ़ी में पैदा हुई हूँ मेरा नाम सावित्री है बचपन से ही मुझे जिद करने की आदत थी। जब मैं बड़ी हो गई तो मैं और ज्यादा घमंडी हो गई।”

एक दिन मुझे गाँव के एक लड़के से प्यार हो गया पर वो किसी और से

प्यार करता था !

मैं गुस्से से पागल हो गई और जबर्दस्ती उस लड़के से शादी करनी चाही

पर पिता जी ने उस लड़के की शादी उसी लड़की से करवादी मैं आपे से बाहर हो गई और उन दोनों को मारना चाहा पर पिता जी ने मुझे मेरे कमरे में बन्द कर

दिया। 

जैसे ही रात हो गई, मैं किसी तरह बाहर निकली और समुद्र में छलाँग लगा दी! मेरी मुक्ति नहीं हो पाई आत्महत्या करने के कारण और उल्टा मुझे हर अमावस की रात इस कमरे में आना पड़ता है और इस कमरे को जलमग्न करना पड़ता है…ये सब मैं नहीं करना चाहती पर में मजबूर हूँ!”

तभी घड़ी ने चार बजे का घण्टा बजाया, वो बुढ़िया गायब हो गई और कमरा पहले जैसा हो गया।

रवि तुरन्त उस कमरे से बाहर निकला और सारे नौकरों को बुला कर उस

कमरे को बंद करवा दिया!

जल्दी ही उसने हवेली को आधुनिक होटल में बदल दिया और खुद शहर

चला गया।

शहर में उसने आलीशान बंगला खरीदा और मजे से वहाँ रहने लगा। होटल के मुनाफे से वो काफ़ी अमीर हो गया था। 

एक रात को जब वो मजे से सोया हुआ था, उसका कमरा पानी से भर

गया और उसी बुढ़िया ने उसकी खूब दुर्गति की!

रवि हैरान था कि इतने दिनों के बाद दोबारा कमरे में पानी क्यों भर गया

जबकि कई अमावस की रातें बीत गई।

उसने बुढ़िया से पूछा तो उसने बताया कि उसके कमरे में जो भी सोएगा

वो उसे परेशान करेगी और अगर कमरा ख़ाली रहा तो हवेली का मालिक

जहाँ भी होगा, वो वहाँ पहुँच जाएगी !

रवि को याद आया कि उसने नौकरों को उस कमरे में अमावस की रात

सोने को मोटी रकम का लालच दिया था!

कइयों ने कोशिश की पर बुढ़िया की आत्मा से डर कर दोबारा कोई उस

कमरे में नहीं सोया और नौकरी छोड़ कर चले गए।

होटल का मैनेजर मालिक को नाराज़ नहीं करना चाहता था इसलिए

नौकरों की जगह अन्य लोगों को उस कमरे में रूम बुक करवा देता। विनय

धीरे-धीरे होटल भूतिया होटल के नामजाने जाना लगा।

रवि ने बहुत उपाय किए पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। वो कहीं भी रहता, अमावस की रात से बच नहीं पाता। हार कर वो दिसम्बर में वापिस होटल आ गया,पक्के इरादे के साथ! 

उन दिनों उनका होटल बाहर से बर्फ से जम जाता था!

आख़िर एक और अमावस की रात आ गई ठीक बारह बजे वो बुढ़िया पानी के समंदर के साथ आ गई!

रवि का हुलिया देख बुढ़िया हँसने लगी!

उसने ख़ूब गर्म कपड़े पहने थे, जब पानी से कमरा भर गया तो वो कंबल

ओढ़ कर खड़ा हो गया। पानी से वो भीगा जरूर पर बाहर से, अंदर से वो

सूखे कपड़ों में सुरक्षित रहा।

“देखो, तुम हमारे खानदान से हो तो हमारी भी सगी हो, क्या हम थोड़ी

हवा में जाकर बात करें!”

“लेकिन बाहर तो ठण्ड है, मुझे ठण्ड पसंद नहीं!” बुढ़िया ने दो टूक मना

कर दिया।

रवि ने किसी तरह उसे राजी कर लिया और वो दोनों कमरे से बाहर निकले। बाहर बहुत ठण्ड थी। बुढ़िया कुछ कदम चलने के बाद रुक गई लेकिन रवि चलता रहा।

“रुक जाओ, मैं जम जाऊँगी बर्फ से, मुझे जाने दो!”

“अच्छा! ठीक है, क्या ये वहीं जगह है जहाँ से तुमने छलांग लगा दी थी?”

“हाँ, यहीं थी पर क्यों गुस्से से बुढ़िया की आँखें लाल हो गईं।

“अच्छा! पर लगता नहीं यहाँ से कोई छलाँग मार सकता है!” रवि ने उसे

उकसाया।

“मैं सच कह रही हूँ, मैं यहीं से कूदी थी!”

“क्या पता!” उसने कंधे उचका दिए!

बुढ़िया एकदम उछली और सीधे समुद्र में जा गिरी!

कुछ देर पानी की छटपटाहट के बाद वो पानी से निकलने लगी तो उसके

पैर बर्फ से क्या हआ मुझे मैं तो जम रही हैं! “बढ़िया घबरा कर बोली।..

अब तुम हमेशा ऐसे जमी रहोगी, मैंने पहले ही बर्फ़ का इंतजाम करवा दिया था, मुझे ठण्ड नहीं लग रही लेकिन तुम तो चलती-फिरती पानी की नदी

हो, इसलिए जम गई… अब मैं आज़ाद हूँ!

” रवि खुशी से बोला। तुमको क्या लगता है कि बर्फ़ कभी पिघलेगी नहीं?… मैं फिर आज़ाद हो जाऊँगी,तब देखना फिर बुढ़िया पूरी तरह बर्फ़ में बदलती जा रही थी।”

“ना! ना! मैंने पहले ही होटल के बेसमेंट में एक परमानेंट बर्फ़ का कंटेनर

बनवा लिया है,जिसमें तुम हमेशा आराम करोगी!”

बुढ़िया बर्फ़ में बदल चुकी थी। रवि के संकेत पाकर कुछ लोग आए और

बुढ़िया की मूर्ति को उठाकर होटल के बेसमेंट में रखवा दिया।

एक साल के बाद रवि ने शादी कर ली। उसने पत्नी को भी सब बताया और बेसमेंट को हमेशा ठंडा रखने की बात कही।

भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, ये कहना तो जल्दबाज़ी होगी पर अभी के लिए वो चैन की नींद सो सकता था, अमावस को!

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