आखिरी सफर Aakhri Safar real story

आखिरी सफर Aakhri Safar real story

अजय नामक तीस वर्षीय व्यक्ति तीन माह बाद अपने भरे-पूरे परिवार में लौट रहा था ।

अजय शहर से बाहर नौकरी करता था, ओर लॉकडाउन के कारण तीन महीने वहां फसे रहने के बाद वो अपने घर जा रहा था। उसके परिवार में उसकी पत्नी थी और तीन बच्चे | अजय रेलगाड़ी से अपने घर का सफर तय कर रहा था | रात काफी हो चुकी थी ट्रेन में सवार सभी लोग अपनी अपनी बर्थ पर सोरहे थेमगर अजय की आंखों में नाम मात्र को नींद नहीं थी, इसका सबसे बड़ा कारण उसे घर जाने की खुशी थी| घर जाने की खुशी में अजय को नींद नहीं आ रही थी और खुशी भी क्यों नहीं होती इतनी जदोजहाद के बाद उसे परमिशन जो मिली थी घर जाने की।

जिंदगी का आखिरी सफर

Aakhri Safar real story

Safar Shayari सफर शायरी के इस पोस्ट में आने वाली सभी लोगों का दिल से स्वागत है। दोस्तों आप भी किसी न किसी सफर में चल रहे है अपनी ज़िंदगी को थोड़ा थोड़ा आगे बड़ा कर अपनी ज़िंदगी का सफर पूरा कर रहे है तो ये शायरी सिर्फ सिर्फ आपके लिए है। हम आपके लिए ये सभी Safar Manzil Shayari की पोस्ट को टेक्स्ट और इमेजेज के साथ लेकर आये है जिससे आप टेक्स्ट को आसानी से कॉपी और इमेज को डाउनलोड कर सकते है।

अजय के अलावा एक व्यक्ति ऐसा और भी था, जो सोया नहीं था। उसकी बर्थ के सामने वाली बर्थ पर ही वह व्यक्ति बैठा था। अपने सामने चुपचाप बैठे व्यक्ति को अजय ने देखा तो जाना कि वह भूतों की कहानी पढ़ रहा था। अजय को लगा कि उसके सामने जो व्यक्ति बैठा है, वह किताब पढ़ के अपना वक्त बिता रहा है शायद उसे भी नींद नहीं आ रही है। अजय को लगा कि वह क्यों न अपने सामने बैठे व्यक्ति से बातचीत करने में अपना समय गुजारे, इसी इरादे के साथ अजय ने उसे पुकारा-“भाई साहब” किताब पढ़ रहे व्यक्ति ने उसकी आवाज को अनसुना-सा करके उस पर कोई ध्यान नहीं दिया |

इस बार अजय तनिक संकोच के साथ बोला “मैंने आपको डिस्टर्ब तो नहीं किया “नहीं” सामने बैठा व्यक्ति सपाट स्वर में बोला अजय मुस्कुराकर उससे बातों का सिलसिला जारी रखते हुए बोला“आपका नाम क्या है। “मनोहर दास” वह बोला | “ओह” अजय ने हल्के से सांस छोड़ते हुए कहा “क्या आप भी अपने घर जा रहे हैं।“नहीं” मनोहर दास ने पूर्ववत स्वर में कहा | तो फिर आप अपने घर से कहीं और जा रहे हैं” अजय ने मुस्कुराते हुए सामान्य स्वर में कहा | मनोहर ने उसे इस नजर से देखा मानो वह कुछ ना कहना चाहता हो  अजय चेहरे से ऐसा प्रकट करने मानो बराबर संकोच कर रहा हो  फिर बोला-“में आज तीन महीने बाद घर वापस लोट रहा हु ये लाकडोन में  परिवार के बिना जो जिया हूं परिवार से मिलने की खुशी में मुझे नींद नहीं आ रही है इसलिए मैंने सोचा थोड़ा आपसे बात ही कर लूं |”

आखिरी सफर Aakhri Safar real story

दोस्तों Suhana Safar Shayari की इस पोस्ट में आपके ज़िंदगी के सुहाने सफर की एक से बढ़िया एक शायरी दी गयी है और अगर आप Zindagi Ka Safar Shayari ढूंढ रहे है तो ये भी कुछ चुनिंदा शायरी सिर्फ आपके जैसे सफर करने वाले लोगों के लिए है।

मनोहर कुछ ना बोला वह उसकी बात पर सिर हिलाकर रह गया, मानो उसकी बात पर सहमति जता रहा हो । मनोहर के हाव भाव से साफ जाहिर था कि वह बात करने के मूड में बिल्कुल नहीं था |

वह निरंतर जता रहा था कि जैसे उसे इस समय बात करना बिल्कुल अच्छा न लग रहा हो । मगर आज तो जैसे अजय चुप रहने के मूड में बिल्कुल नहीं था, वह बातों को बढ़ावा देते हुए बोला- भाई साहब, क्या आप भूत-प्रेतों पर विश्वास करते हैं।” हां” मनोहर अपने छोटे से उत्तर में बात को पूरा किया “मगर कैसे” अजय बोला -“क्या आपने कभी किसी भूत या प्रेत को अपनी आंखों से देखा है। “उसके प्रश्न पर मनोहर ने चंद लम्हो तक उसे ध्यान पूर्वक इस तरह देखा मानो उससे बहुत कुछ कहना चाहता हो । मगर ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। कुछ कहने के स्थान पर मनोहर ने किताब अपने चहरे के सामने की। ओर पढ़ने लगा|  अजय ऐसा देख उलझ गया । उसकी समझ में नहीं आया की। मनोहर ने उसकी बात का कोई जवाब नही देकर ” अपना चेहरा। किताब में क्यों छुपा लिया ?

जिंदगी का आखिरी सफर Aakhri Safar real story

दोस्तों आप ट्रैन में सफर कर रहे हो या बस में या फिर एयरोप्लेन में ये शायरी आपके व्हाट्सप और फेसबुक के स्टेटस की शोभा का और बढ़ा देंगी। आपके दिल के सफर के हालत को बयां करने वाली ये शायरी आपको जरूर पसंद आएँगी तो चलिए अब Shayari On Safar In Hindi पोस्ट को शुरू करते है।

इस बार अजय ने संकोच भरे स्वर में कहा- आपने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया, भाई साहब” जवाब के रूप में मनोहर ने अपने चेहरे के आगे लगी किताब हटाई तो उसका बहुत ही भयंकर चेहरा अजय के सामने आ गया | मनोहर का चेहरा इतना डरावना हो चला था कि यदि कोई मानव उस चेहरे को देखकर अपने प्राण भी गवा बैठता तो हैरानी की बात नहीं थी। उसका चेहरा पूरी तरह जला हुआ और उसके आंखों की पुतलियां गायबथी । होंठ कटे हुए जिनसे खून गिर रही थी।

उसका डरावना चेहरा देखते ही अजय की आंखों में मानो दुनिया भर का खौफ सिमट आया था। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी। अजय की दोनों हथेलियां बर्थ से इस तरह सट गई थी, मानो उनके सहारे से वह उठकर खड़ा होना चाहता हो, उसकी पीठ पिछले भाग से सट गई थी। अजय उस समय अपनी सोचने की शक्ति में नहीं था उससे समझ ही नहीं आ रहा था। वो क्या करे यह तक की उसकि आवाज भी नही निकल पा रही थी। अजय जान गया था की उसके सामने मौजूद मनोहर कोई मनुष्य नहीं, बल्कि एक पिशाच है अजय बेबस रहकर अपने स्थान पर शिवाय बैठे रहने के कुछ ना कर सका |उसके सामने बैठा डरावना चेहरे व लंबे-लंबे दांत वाला पिशाच ठहाके लगाकर बोला- “अब तुम्हें विश्वास हो चला होगा कि आज के समय में भी भूत-पिशाच जैसी चीजें मौजूद है |“

जिंदगी का सफर शायरी | Zindagi Ka Safar Quotes in Hindi

क्या तुम सचमुच भूत हो” अजय ने भय से परिपूर्ण स्वर में पूछा। “अब भी तुझे यकीन नहीं आया मूर्ख, कोई बात नहीं मैं जब तेरा खून पिऊंगा, तब तुझे यकीन आ जाएगा |” नहीं-नहीं मुझे मत मारो, मेरे तीन बच्चे और मेरी पत्नी घर पर मेरे आने की राह देख रही है । अगर मैं मर गया तो उनका सहारा छिन जाएगा, मुझे जाने दो| “कहते हुए अजय अपने स्थान से सरकने लगा | वह पिचाश उसे देखकर कुटीर मुस्कान मुस्कुराता रहा।अजय भागने के चक्कर में अपने स्थान से फुर्ती के साथ उठा और दौड़ पड़ा। उसी समय उस पिशाच ने अपने स्थान पर बैठे रहकर ही दाहिना हाथ उठाया उसका हाथ लंबा होता चला गया। वहीं बैठे रहकर उसने भाग रहे अजय की गर्दन पकड़ ली और उसे अपनी तरफ घसीट लिया | अजय बार बार भागने की कोशिश करता पर वो अपने जगह से भी नहीं हिल पा रहा था।

जिंदगी का सफर शायरी

अजय फ़िर चिल्लाया- “ बचाओ-बचाओ” कोई तो बचाओ ये मुझे मार डालेगा ! उसकी पुकार सुन रेल मैं सवार सभी यात्री उसके पास चले आने लगे कुछ ट्रेन के छत पर उल्टे लटके उसकी तरफ बढ़ने लगे तो कुछ हाथ के बल। अब उसे यह समझने में ज्यादा वक्त न लगा कि ट्रेन में सवार सभी यात्री इंसान नहीं बल्कि भूत पिशाच हैं। पूरी रेल गाड़ी पिशाचों से भरी थी| धीरे-धीरे अजय को चारों ओर से पिशाचों ने घेर लिया | इस चक्रव्यू में फसने के बाद अजय अपने दिल पर काबू ना रख सका और उसे दिल का दौरा पर गया जिसके कारण उसकी मृत्यु वहीं हो गई।

आखिरी सफर Aakhri Safar real story

इसी के साथ सारे पिशाच और भूत अजय का खून पीने के साथ-साथ उसकी बोटी-बोटी तक नोच कर खा गए और मौत के खूनी खेल का अंत हुआ।और वापस सन्नाटा पूरी ट्रेन में छा गया। और ट्रेन फिर वापस उसी स्टेशन पर जा खड़ी हुई। एक बार फिर एक नए मुसाफिर के लिए|

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